Thursday, 23 November 2017

मेरे गुजरात ( सूरत ) के आदरणीय , प्यारे भाई व बहनो व व्यापारियो से एक अपील

मेरी एक  अपील ---
मजूरा से मेरे अपने - श्री अशोक कोठारी 

उधना से श्री सतीश पटेल
चोर्यासी से श्री योगेश पटेल को अपना मत दे ... एक बात साफ कर दु मे राजनीति से कोसो दूर हु मगर इन प्रत्याशी को वोट देने की अपील इस लिए कर रहा हु कही न कही से इनसे परिचित हु इनका चुनाव मे जीत हमारे क्षेत्र की प्रगति ओर हमारी समस्या का समाधान

जैसा कि आप जानते हैं. पिछले कुछ सालों से देश एक बुरे दौर से गुज़र रहा है. नोटबंदी और जीएसटी की वजह से काम-धंधे बंद हो गए हैं. लगातार बढ़ती महंगाई से आप व हमारा जीना दुश्वार हो गया है. देश में सांप्रदायिक और जातिगत तनाव बढ़ा है. देश की एकता और अखंडता ख़तरे में पड़ गई है. ऐसी हालत में देश को कांग्रेस से बहुत उम्मीदें हैं.
लेकिन ईवीएम की वजह से देश परेशान है. उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जब मतदाताओं ने वोट कांग्रेस को दिया है, लेकिन वह किसी अन्य दल के खाते में गया है. इस मामले में कहा जा रहा है कि मशीन ख़राब है. माना कि मशीन ख़राब है, तो फिर सभी वोट किसी ’विशेष दल’ के खाते में ही क्यों जा रहे हैं? साल के शुरू में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भी ऐसे मामले सामने आए थे. किसी विशेष दल के खाते में वोट जाने के मसले को लेकर जहां पार्टी कार्यकर्ता परेशान हैं, वहीं मतदाता भी कशमशक में हैं.
जैसा कि आप जानते हैं, लोकतंत्र यानी जनतंत्र. जनतंत्र इसलिए क्योंकि इसे जनता चुनती है. लोकतंत्र में चुनाव का बहुत महत्व है. निष्पक्ष मतदान लोकतंत्र की बुनियाद है. यह बुनियाद जितनी मज़बूत होगी, लोकतंत्र भी उतना ही सशक्त और शक्तिशाली होगा. अगर यह बुनियाद हिल जाए, तो लोकतंत्र की दीवारों को दरकने में देर नहीं लगेगी. फिर लोकतंत्र, राजतंत्र में तब्दील होने लगेगा. नतीजतन, मुट्ठी भर लोग येन-केन-प्रकारेण चुनाव जीतकर लोकतंत्र पर हावी हो जाएंगे.
देश की आज़ादी के बाद निरंतर चुनाव सुधार किए गए. मत-पत्र के इस्तेमाल की बजाय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) द्वारा मतदान कराया जाने लगा. इससे जहां वक़्त की बचत हुई, मेहनत की बचत हुई, वहीं धन की भी बचत हुई. इतना ही नहीं, मत पेटियां लूटे जाने की घटनाओं से भी राहत मिली. लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि ईवीएम की वजह से चुनाव में धांधली कम होने की बजाय और बढ़ ज़्यादा गई. पिछले काफ़ी वक़्त से चुनाव में ईवीएम से छेड़छाड़ के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इस तरह की ख़बरें देखने-सुनने को मिल रही हैं कि बटन किसी एक पार्टी के पक्ष में दबाया जाता है और वोट किसी दूसरी पार्टी के खाते में चला जाता है. इसके अलावा जितने लोगों ने मतदान किया है, मशीन उससे कई गुना ज़्यादा वोट दिखा रही है.
जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज केंद्र की सत्ता में नहीं है, लेकिन इसके बावजूद वह देश की माटी में रची-बसी है. देश का मिज़ाज हमेशा कांग्रेस के साथ रहा है और आगे भी रहेगा. कांग्रेस जनमानस की पार्टी रही है. कांग्रेस का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है. इस देश की माटी उन कांग्रेस नेताओं की ऋणी है, जिन्होंने अपने ख़ून से इस धरती को सींचा है. देश की आज़ादी में महात्मा गांधी के योगदान को भला कौन भुला पाएगा. देश को आज़ाद कराने के लिए उन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी समर्पित कर दी. पंडित जवाहरलाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी, राजीव गांधी जी और आपने देश के लिए, जनता के लिए बहुत कुछ किया है. पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने विकास की जो बुनियाद रखी, इंदिरा गांधी जी ने उसे परवान चढ़ाया. राजीव गांधी जी ने देश के युवाओं को आगे बढ़ने की राह दिखाई. उन्होंने युवाओं के लिए जो ख़्वाब संजोये, उन्हें साकार करने में आपने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी.
जनता कांग्रेस के साथ खड़ी है, लेकिन उसे ईवीएम पर यक़ीन नहीं. उसे भरोसा नहीं कि उसका कांग्रेस को दिया वोट कांग्रेस के पक्ष में जाएगा भी या नहीं. इसलिए आपसे अनुरोध है अब चुनाव की घोषणा के साथ प्रत्याशी मेदान मे अभी ईवीएम का विरोध करना मूर्खता होगी मगर ध्यान रखना होगा की ईवीएम के साथ छेड़ छाड़ न हो , क्योंकि ईवीएम से हमारा यक़ीन उठ चुका है.
आपका - उत्तम जैन ( विद्रोही )
मालिक , मुद्रक , प्रकाशक - प्रधान संपादक - विद्रोही आवाज
संपर्क -8460783401 

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