Sunday, 16 April 2017

सुखी बहू गाव की

 मे यदा कदा ब्लॉग लिखता हु ... विचारो की अभिव्यक्ति व्यक्त करता हु ... कहानी कभी लिखी नही प्रथम बार कोशिश की कोई शिक्षाप्रद कहानी लिखू आज की वर्तमान समस्या पर अच्छी लगे होसला बढाये ....सभी नाम व स्थान काल्पनिक है
शीर्षक - सुखी बहू गाव की
एक छोटा सा गाव था उस गाव मे एक स्कूल था वह भी 10 वी तक गाव की लड़कियो की ज्यादा से ज्यादा शिक्षा 10 वी तक ही होती थी माँ बाप कम शिक्षित थे लड़कियो को पड़ोस के शहर मे शिक्षा के लिए भेजना पसंद नही करते थे क्यू की सोचते थे शहर मे जाकर लडकीया गलत राह पर न चली जाये ! गाव की बहुए भी ज्यादा पढ़ी लिखी नही थी ! 10 वी तक पढ़ी हुई तो मुश्किल से 2-4 होगी ! गाव की महिलाओ की दुनिया गाव तक ही सीमित थी ! यदा कदा शहर की ओर जाना होता था ! मगर गाव की बहुये खुद मस्ती मे रहती थी ! कभी घर मे सास बहू मे अनबन होती रहती थी एक बहू गाव मे ऐसी थी जो ज्यादा पढ़ी लिखी थी उसके सास व परिवार किसी से नही जमती थी आए दिन किसी न किसी बात पर सास बहू देवरानी जेठानी से झगडा होता रहता था ! गाव की एक अनपढ़ बहू ऐसी भी थी उसे सास सहित पूरे परिवार का सन्मान मिलता था पढ़ी लिखी बहू से एक दिन अनपढ़ बहू से अनायास मुलाक़ात हो गयी पढ़ी लिखी बहू ने अनपढ़ बहू से पूछा बहन तू मुझसे कम पढ़ी लिखी है मुझ जितना ज्ञान भी नही फिर भी तेरा नसीब कितना अच्छा तुझे सास सहित पूरे परिवार का सन्मान मिलता है मुझे देख न सास का प्यार न परिवार का प्यार मिलता है ओर तो ओर मेरा पति भी खुद की माँ की तरफदारी करता है अनपढ़ बहू सुनती रही निशब्द थी बार बार पढ़ीलिखी बहू बार बार प्रश्न करती रही तो अनपढ़ बहू बोली बहन मेरी सास व पूरा परिवार मुझे प्यार देता है इसका कारण यह है की मे अपने पति से निश्चल अटूट प्यार करती हु उसकी हर भावनाओ का ख्याल रखती हु जब मुझे लगा मेरा पति मेरी सास व ससुर को सदेव खुश देखना चाहते है ओर मुझे लगा मेरे पति की खुशियो मे क्यू नही मे शामिल हो जाऊ मे अपने पति से ज्यादा मेरी सास ससुर सभी की इज्जत करने लगी उनकी हर भावनाओ का ख्याल रखने लगी उनकी सेवा को अपना धर्म समझने लगी मुझे मेरा पति अपनी माँ व पिता की सेवा करते हुए देखता बड़ा खुश होता था खुद को शोभाग्यशाली समझने लगा ओर मुझे अथाह प्यार करने लगा ! आज मुझे मेरा पति भी प्यार करता है पूरा परिवार सन्मान करता है उसका रहस्य यही है मेने अपने पति की भावनाओ को समझा ओर उनके माँ पिता को सन्मान व प्यार दिया पूरी सेवा करती हु तो मेरा पति मुझ पर गर्व महसूस करता है ओर मुझे अथाह प्यार करता है बहन मेरी खुशी व घर मे मिलता सन्मान का रहस्य यही है पढ़ी लिखी बहू स्तब्ध थी खुद सोचने लगी मे इतनी शिक्षित होने के बाद भी कभी पति की भावनाओ को नही समझी सास व ससुर को अनदेखा करती गयी जिससे न परिवार मे सन्मान पायी न पति का प्यार मिला खुद मे परिवर्तन करने का मिशन लेकर अनपढ बहू से विदा ली .....
सार - हर पत्नी चाहे पति को कितना भी प्यार करे मगर पति की भावनाओ का सन्मान नही करेगी उसे न पति का प्यार मिलता है न परिवार का
लेखक - उत्तम जैन ( विद्रोही )

Sunday, 9 April 2017

महावीर जन्म कल्याणक पर महावीर के सिद्धांतो जीवन में उतारे तभी सार्थक है जन्म कल्याणक मनाना -----

आज हम सभी ने भगवान महावीर जयंती का परम पावन पर्व मनाया l मेने फेसबूक व व्हट्सअप व शोशल मीडिया पर देखा देश विदेश मे बड़े हर्ष के साथ भगवान महावीर जन्म कल्याणक मनाया गया! सभी समाजबंधू इस महापर्व को हर्षोल्लासपूर्वक मनाने की तैयारियों में जुटे बड़ा गर्व भी हुआ l इस बार भव्य शोभायात्राएं व् चल समारोह निकलें, भगवान महावीर के आदर्शों व् सिंद्धांतों पर चलने की शपथ ली , संकल्प लिये l जिस तरह इन कार्यक्रमों की भव्य रूप से मनाया गया है, उसे देखते हुए प्रतीत होता है की समाज का प्रत्येक संगठन और प्रत्येक व्यक्ति भगवान महावीर का सच्चा अनुयायी है l बड़े गर्व की अनुभूति हुई ! एक विचार आया स्वयं को भगवान महावीर के सिद्धांतों के लिये सर्वाधिक प्रतिबद्ध सिद्ध करने का अवसर भला महावीर जयंती से अधिक अनुकूल दूसरा क्या होगा, इसीलिए प्रत्येक संगठन, प्रत्येक मंदिर के पदाधिकारी और प्रत्येक समाजबंधू अपने घरद्वार और कारोबार की चिंता छोड़ इस बार भी धूमधाम के साथ भगवान महावीर जयंती मनाई अपने प्रतिष्ठान भी बंद रखे l
एक बड़े अभियान या लक्ष्य को हासिल करने जैसा वातावरण निर्मित कर भव्यता के मामले मे एक-दुसरे को पीछे छोड़ने की तैयारी है l महावीर जयंती मनाने की तैयारियों में जुटे भक्तों से मेरा प्रश्न है की तुमने भौतिक रूप से तो महावीर को अंगीकार कर लिया लेकिन क्या आत्मिक रूप से तुमने महावीर को अपनाया है, क्या वाकई में तुम महावीर की शिक्षाओं अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य और ब्रम्हचर्य पर चले हो या चलने का प्रयत्न किया है, नहीं न, तो फिर महावीर जयंती को एक दुसरे से अधिक भव्य स्वरुप में मनाएं जाने वाले इस उत्सव का उत्साह क्यों?……..
अरे भई, मैं आपसे महावीर बनने के लिए नहीं कह रहा हूँ l हम या आप लाख जतन करके भी महावीर जैसे विरत व्यक्तित्व के जेसे नही हो सकते लेकिन महावीर के साथ जिया तो जा सकता है, उन जैसा बनने का प्रयत्न तो किया ही जा सकता है, और यह तभी संभव है जब हम उनकी शिक्षाओं और सिंद्धांतो को अपने जीवन में आत्मसात करें और अपने दैनिक व्यवहार में उन्हें क्रियान्वित करें l महावीर जयंती मनाने में व्यस्त आप सभी में से कितने लोगों ने ऐसा किया है या करने की कौशिश की है l नहीं न l आप तो महावीर के सूत्रों का उपयोग समाज में दूसरों को आईना दिखने के लिए करते हो, स्वयं उन सूत्रों को अपने जीवन में क्रियान्वित क्यों नहीं करते! महावीर के सिद्धांतों का उदाहरण देकर दूसरों पर तो दोषारोपण करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते लेकिन क्या कभी स्वयं के चेहरे पर लगी कालिख को देखने की भी कौशिश की है? जबकि महावीर की प्रतिमा की झुकी हुई निगाहें कहती है की स्वयं को देखो जबकि हम हर समस्या का उत्तरदायी दूसरों को बनाते है l भगवान महावीर कहते है की हम जो भी है, किस भी हाल में है, उसके हम की एकमेव कारण है l
क्या आप महावीर के इस दर्शन को जीते हो की अपनी स्थिति और परिस्थिति के लिए सिर्फ हम ही कारण है और जवाबदेह है l दुसरो पर अपनी समस्याओं का आरोपण करने के बजाय जब हम अपने अन्तर्मन में झांककर कारणों की तलाश करने लगेगे, उस दिन तुम कुछ हद तक स्वयं को महावीर के निकट पाने लगेगे l मैं प्रभावना करने से नहीं रोक रहा और न ही मैं महावीर जयंती महोत्सव मनाने का विरोध कर रहा हूँ, खूब हर्षोल्लास के साथ मनायी है ओर मनाना भी है लेकिन महावीर को भी जियो l शोभायात्रा में बैंडबाजों के साथ चलो लेकिन कुछ पल महावीर के साथ भी चलो, यह भौतिक रूप से संभव नहीं होगा, इसके लिए तुम्हे अपनी आत्मा से द्वार खोलना पड़ेंगे l मैं पुरे विश्वास के साथ कहता हूँ की महावीर को पूजने वाला मोक्ष जाए या न जाए लेकिन महावीर को जीने वाला मोक्ष जरुर जाएगा l जरा सोचो, हमने जो जीवनशैली अपनाई है, अपने आसपास जो दिखावटी सुन्दर सा आवरण ओढ़ रखा है, क्या वह भगवानमहावीर को भाएगा?
आज यदि भगवान महावीर दुनिया में लौट आएं तो क्या वे हमे पसंद करेंगे l महावीर को तो सारा विश्व पसंद करता है लेकिन क्या तुम्हारे कर्म और आचरण ऐसा है की महावीर तूम्हे पसंद करेंगे l नहीं न, तो क्यों नहीं बदल लेते स्वयं को और प्रभावना के बजाए साधना को महत्व क्यों नहीं दे रहे हो? 
क्या इसी समाज की कल्पना की थी भगवान महावीर ने :-क्या जब महावीर मोक्ष गए होंगे, तब क्या उन्होने ऐसे ही समाज की कल्पना की होगी! क्या उन्होंने इसी के लिए समोशरण में बैठकर संदेश दिया होगा l तुम्हारी कथनी और करनी में जो बड़ा विभेद है, उसी के कारन तुम्हे महावीर का वह तप, महावीर की तपस्या व्यर्थ नजर आती है l ऐसा लगता है जैसे सभी ने महावीर को बांट दिया है l पहले लोगों ने धर्म में पंथ बांटे, फिर संत l अब भगवान की मूर्तियों को ही बांटने लगे l बांटने और समाज को विभाजित करने का यह सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है l हमे महावीर जन्मकल्याणक पर दृढ़ संकल्प लेना होगा की भगवान महावीर के दिये संदेश को जीवन मे उतारे तभी महावीर जयंती मनाना हमारे लिये सार्थक होगी ....... जय महावीर
फिर से आपको महावीर जन्म कल्याणक पर शुभकामना
उत्तम जैन ( विद्रोही )
संपादक - विद्रोही आवाज़  

Saturday, 8 April 2017

डिनर विवाद: केजरीवाल सरकार की पार्टी में 13 हजार रुपये की थाली-बीजेपी

बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजेन्द्र गुप्ता ने आम आदमी पार्टी (आप) पर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा बर्बाद करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने आवास पर दो दिनों में 80 मेहमानों को भोजन कराने में 11,04,357 रूपये खर्च किए जो अपने आप में सरकारी लंच का रिकार्ड है।
विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने दो दिनों में 80 मेहमानों को भोजन कराने में 11,04,357 रूपये खर्च किये यानि एक मेहमान के लंच पर 13,805 रूपये खर्च आया। नियम के अनुसार सरकार गैर सितारा होटल में आयोजित होने वाले लंच पर 1250 रूपये खर्च कर सकती है लेकिन सभी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दिल्ली सरकार ने 1100 प्रतिशत ज्यादा रूपये खर्च किये।
उन्होंने दावा किया कि केजरीवाल सरकार ने एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर आयोजित समारोह में यह खर्च किया। केजरीवाल पर चुटकी लेते हुए दिल्ली विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए एक वर्ष की उपलब्धियों को गिनाने के लिए यह राशि तो कुछ भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि आप सरकार जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा दोनों हाथों से लुटा रही है। किसी भी सरकार के लिए टैक्स जनता की अमानत होता है और उसे सुनिश्चित करना होता है कि इसे ठीक ढंग से खर्च किया जाए। लेकिन केजरीवाल सरकार पिछले दो वर्षों में अमानत में खयानत का रिकॉर्ड बना चुकी है।
AAP की सफाई
हालांकि आम आदमी पार्टी ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया है। उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बिल जारी करने वाले वेंडर के खिलाफ जांच के आदेश दिये हैं। उनका कहना है कि जांच पूरी होने तक बिल नहीं चुकाया जाएगा।
सिसोदिया ने कहा कि एक साल पहले अफसरों ने 13 हजार रुपये प्रति प्लेट कीमत के खाने के बिल की फाइल मेरे पास मंजूरी के लिए भेजी थी, लेकिन मैंने इसे मंजूरी देने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा कि छह महीने पहले यह फाइल पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने तलब की थी। तब से यह फाइल राजनिवास में पड़ी है।
सिसोदिया ने पिछले कुछ दिनों से हो रहे इस तरह के खुलासों के पीछे राजनिवास को भी निशाने पर लेते हुये कहा कि खाने के बिल की फाइल छह महीने से जानबूझ कर चुनाव के समय लीक करने के लिये उपराज्यपाल कायार्लय में रोक कर रखी गयी थी। सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा कि एलजी ऑफिस के अफसर बीजेपी के इशारे पर सरकार को बदनाम करने के लिये आधी जानकारी के साथ फाइलें लीक कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लीक किए गए दस्तावेजों में यह नहीं बताया गया है कि दस महीने पहले बिल के भुगतान को रोकने के लिये उन्होंने फाइल पर क्या लिखा था। सिसोदिया ने बीजेपी को इस मामले से जुड़ी पूरी फाइल और इस पर उनके नोट को भी सार्वजनिक करने की चुनौती दी।

महावीर जयंती पर हार्दिक शुभकामना.

जब जब मनुष्य अज्ञानता के भंवर जाल फंसता है,तब तब किसी महापुरुष का अवतार इस धराधाम पर होता है।ऐसे ही मानव समाज को अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले महापुरुष भगवान महावीर का जन्म ईसा से 600 वर्ष पूर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में त्रयोदशी तिथि को हुआ था। हमारे देश में वर्धमान महावीर का जन्मदिन महावीर जयंती के रुप मे बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। वर्धमान महावीर जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान श्री आदिनाथ की परंपरा में चौबीसवें तीर्थंकर हुए थे। वर्धमान महावीर का जन्म एक क्षत्रिय राजकुमार के रूप में एक राज परिवार में हुआ था।इनके पिता का नाम राजा सिद्धार्थ और माता का नाम प्रियकारिणी देवी था। इनका जन्म बिहार के वैशाली राज्य में हुआ था।
कहते हैं तीस वर्ष की उम्र में महावीर स्वामी ने घर-बार छोड़ दिया और कठोर तपस्या द्वारा कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया।महावीर स्वामी जी ने श्रद्धा एवं विश्वास द्वारा जैन धर्म की पुन: प्रतिष्ठा स्थापित की तथा आधुनिक काल में जैन धर्म की व्यापकता और उसके दर्शन का श्रेय महावीर स्वामी जी को जाता है।संपूर्ण संसार को ज्ञान का संदेश देने वाले भगवान महावीर जी ने अपने कार्यों से अपने जीवनकाल में सभी का कल्याण करते रहे।जैन श्रद्धालु इस पावन दिवस को महावीर जयंती के रूप में परंपरागत तरीके से बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धाभक्ति से मनाते हैं।जैन मतावलंबियों का मानना है कि वर्धमान जी ने घोर तपस्या द्वारा अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर ली थी, जिस कारण वह विजेता और उनको महावीर कहा गया और उनके अनुयायी संसार में जैन कहलाए।देशभर में तप से जीवन पर विजय प्राप्त करने का पर्व महावीर जयंती के रूप में मनाया जाता है। श्रद्धालु मंदिरों में भगवान महावीर की मूर्ति को विशेष स्नान कराते हैं, जो कि अभिषेक कहलाता है।वहीं भगवान की मूर्ति को सिंहासन या रथ पर बिठा कर उत्साह और हर्षोउल्लास पूर्वक जुलूस निकाले जाते हैं। जिसमें बड़ी संख्या में जैन धर्मावलम्बी शामिल होते हैं।श्वेतांबर संप्रदाय जो मूर्तिपुजा मे विश्वाश नही करते वह भी बड़े हर्षो उल्लास से महावीर जयंती मानते है चौबीस ‍तीर्थंकरों के अंतिम तीर्थंकर महावीर के जन्मदिवस प्रति वर्ष चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को मनाया जाता है। जैन समाज द्वारा दिन भर अनेक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है महावीर का जन्मोत्सव संपूर्ण भारत में धूमधाम से मनाया जाता है।आपको बता दें कि वर्धमान महावीर जी को 42 वर्ष की अवस्था में जूभिका नामक गांव में ऋजूकूला नदी के किनारे घोर त्पस्या करते हुए जब अनेकों वर्ष बीत गए तब उन्हें मनोहर वन में साल वृक्ष के नीचे वैशाख शुक्ल दशमी की पावन तिथि के दिन कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई। जिसके पश्चात वह महावीर स्वामी बने।और देश भर में भ्रमण करके लोगों में फैली कुरूतियों एवं अंधविश्वासों को दूर करने का निरंतर प्रयास किया साथ ही धर्म की वास्तविकता को स्थापित कर सत्य एवं अहिंसा का समाज में संदेश दिया।इस वर्ष महावीर जयंती 9 अप्रैल 2017, को देशभर में बड़े ही धूमधाम से मनाई जाएगी।आप सभी स्नेहीजनो को महावीर जयंती की हार्दिक
शुभकामनाएं ओर बधाई।
उत्तम जैन ( विद्रोही ) 
विद्रोही आवाज़ समाचार - प्रधान संपादक 

Wednesday, 22 March 2017

नाजायज़ विरोध है मुसलमानो का


यह एक कटु सत्य है कि आज भारतीय महाद्वीप में जितने भी मुसलमान हैं , उनके पूर्वज कभी हिन्दू थे, जिनको मुस्लिम बादशाहों ने जबरन मुसलमान बना दिया था ! राम मंदिर का निर्माण हिन्दुओ का सदेव मुद्दा रहा है क्यू की हिन्दूओ की आस्था प्रमुख कारण है  समय समय पर इन आस्थाओ को नेताओ व राजनीतिक पार्टियो ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए खूब अच्छे से भुनाया भी है ! मगर आज हर हिन्दू का सपना है राम जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण करना है अब उत्तरप्रदेश मे योगी जी के मुख्यमंत्री बनने व भाजपा के पूर्ण बहुमत से सरकार बनने व माननीय अदालत के सुझाव की दोनों पक्ष आपस मे बेठकर निर्णय करे फिर यह मुद्दा ताजा हुआ है !
 न्यायालय का यह सुझाव कि मंदिर विवाद दोनों पक्ष आपस में सुलझा लें मुसलमानों ने मानने से इनकार कर दिया है। जफरयाब गिलानी ने कहा कि राम का तो अस्तित्व ही नहीं था फिर आस्था कैसी? निश्चित तौर पर गिलानी की इस बात पर हर मुसलमान ताली पीट रहा होगा। जो मुसलमान राम के पाँच हजार साल पहले के अस्तित्व को नकार रहे हैं वो अपने आराध्य के मात्र डेढ़ हजार साल से भी कम समय के अस्तित्व का कोई प्रमाण दे दें क्योंकि यह तो आसान होना चाहिए परन्तु बात वही है कि सपने तो सपने ही होते हैं सपनो का प्रमाण नहीं होता।
राम मंदिर स्थल की खुदाई में बहुत सी ऐसी वस्तुएँ मिली हैं जो सैकड़ों हजारों वर्ष पीछे की कहानी कहती हैं। ये वस्तुएँ राम मंदिर का प्रमाण भी देती हैं। कोई किसी के घर में कब्जा कर ले तो जिसके घर पर कब्जा हुआ है वो अपना अधिकार जरूर ही माँगेगा भले सौ या हजार साल बाद माँगे क्योंकि वो तभी माँगेगा जब वह सक्षम हो जाएगा। वैसे भी भारत में राम ही पैदा हुए थे न कि बाबर फिर बाबरी मस्जिद कैसे बन सकती है। निश्चित ही आततायी बाबर आया और हिजड़े और आपस में दुश्मनी रखने वाले हिंदू राजाओं को मार काट कर मंदिर की जगह मस्जिद बनवा गया। नमाज़ पढ़ने के लिए कुछ नपुंसक कायर हिंदुओं को मुसलमान बनाया उनकी औरतों को बलात्कार कर दोगली संतानें पैदा की और यह सब इतना किया कि यह संख्या काफी बढ़ गई। इनको पीढ़ी दर पीढ़ी गँवार बनाए रखा और डर भय से कट्टर बनाया। वही लोग है जो आज हमको सेकुलर देखना चाहते हैं परन्तु खुद बाबर बनकर हमें दबाना चाहते हैं। और जो कुछ अच्छे मुसलमान निकल जाते हैं उनको ये कट्टरपंथी मुसलमान तक नहीं मानते हैं। आज के दोगले हिंदू नेता ही आज की विषम परिस्थितियों के जिम्मेदार अधिक हैं। सत्य यही है कि बात चाहे आस्था की की जाए या फिर साक्ष्यों की अयोध्या राम की नगरी थी है और रहेगी। वहां राम मंदिर था और होना चाहिए। शायद कुछ अच्छे लोगों की अच्छाई को मान्यता मिलेगी और मंदिर निर्माण होगा। कांग्रेस सपा बसपा जद (ए टू जेड) टीएमसी आदि के गंदगी के कीड़े जैसे लोग नाली की गंदगी और नहीं फैला पाएंगे। बदबू समाप्ति की ओर है…. 
उत्तम जैन (विद्रोही )

अंगदाता परिवार सन्मान समारोह

अंगदाता परिवार सम्मान समारोह में सादर आमंत्रण
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जैसा कि आप सभी को विदित ही होगा कि गत दिनों अड़ाजण रोड़ निवासी उर्विश भाई एंव विश्वा बेन  गोलवाला की साढ़े तीन वर्षीय लाडली बिटिया डिजा को मष्तिस्क में पानी भर जाने से  BAPS  हॉस्पिटल में उपचार हेतु भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने डिजा का ब्रेन डेड घोषित कर दिया था, और इस नन्ही सी खूबसूरत परी को बचाया नही जा सका, इन परिस्थितियों के चलते शहर में अंगदान हेतु जागरूकता अभियान में सेवारत 'डोनेट लाइफ' के अध्यक्ष श्री नीलेश भाई मांडलेवाला ने डिजा के अभिभावकों से सम्पर्क कर डिजा के अंगदान हेतु निवेदन किया, जिसे गमगीन परिवार जनों ने स्वीकृति प्रदान कर दी थी, तथा 'डोनेट लाइफ' के प्रयासों से डिजा के शरीर से 2 किडनी  एक लिवर व नेत्र संग्रहित कर दिया गया, डिजा के शरीर से प्राप्त एक किड़नी पोरबन्दर के 8 वर्षीय गोकुलेश ओडेदरा तथा दूसरी किड़नी अहमदाबाद की 6 वर्षीय रितिका देसाई व लिवर विसनगर के 5 वर्षीय श्रेय पटेल के प्रत्यारोपण कर दिया गया था व नेत्र लोकदृष्टि नेत्र बैंक के डॉ प्रफुल्ल भाई सिरोय्या ने स्वीकार किए थे, दिवंगत डिजा जाती जाती तीन बच्चों को नवजीवन प्रदान कर गई, इस मानवतावादी प्रयासों हेतु डिजा के परिवार जनों की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम हैं, इन प्रयासों को सम्मान प्रदान करने हेतु 'बेटी बचाओ राष्ट्रीय अभियान' द्वारा आगामी शुक्रवार 24 मार्च 17 को शाम 7 बजे सिटीलाइट स्थित अग्रसेन भवन के बोर्ड रूम में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया हैं, इस सम्मान कार्यक्रम में शहर की तमाम संस्थाएं तथा सदस्य गण अंगदाता परिवार का सम्मान कर सकते हैं, आप सभी से अनुरोध हैं कि इस मानवता वादी प्रयासों की अनुमोदना करने हेतु आप अपने इष्ट मित्रों सहित अवश्य उपस्थित रहें,
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अंगदाता परिवार का सम्मान कार्यक्रम
दिनांक- शुक्रवार, 24 मार्च, शाम 7 बजे
स्थान- अग्रसेन भवन, सिटीलाइट, सूरत
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              ÷सम्पर्क सूत्र÷
नरेश मंड्रेलिया-07405294311
विनोद अग्रवाल-09374529441
गणपत भंसाली-09426119871

Saturday, 18 March 2017

भूतकाल व वर्तमान ...... बीती ताही बिसार दे

हममें से अधिकतर लोग क्या भूत के विलाप और भविष्य की चिन्ता में ही जीवन  बिता देते है  ओर वर्तमान क्षण के सुख से वंचित रह जाते हैं। हम जीवन के सौन्दर्य व आनन्द को भूल जाते हैं। यह सब हमारी मनःस्थिति के कारण होता है।हमारा   दृष्टिकोण ऐसा ही होना चाहिए की  हमारे पास केवल यही क्षण है। इसमें अपने पूर्वनिर्धारित मतों के साथ प्रवेश न करे । जब हम भूतकाल पर विलाप करते हुए अथवा भविष्य की चिंता में जीते हैं तो वर्तमान क्षण के सौन्दर्य की अनुभूति से चूक जाते हैं।  विषमताओं को देख कर हमें न तो हवा में उड़ना चाहिए और न ही कागज़ की किश्तियों जैसे डूब जाना चाहिए। लिखते समय, हम एक वाक्य के बाद विराम-चिन्ह क्यों लगाते हैं? ताकि नया वाक्य शुरू कर सकें। हमारा जीवन भी ऐसा ही होना चाहिए। पीड़ा के समय लक्ष्य  को कस कर पकड़े रहें। और इससे भी बढ़ कर, जीवन का अन्त करने का प्रयास तो कभी नहीं करना चाहिए। भटकता मन हमें बहुत कुछ कहेगा। पर कठिन समय के चलते हमारा मन टूट कर बिखर न जाए। मन को सम्भालो। काल का पहिया घूमता रहता है। प्रारब्ध कितने ही रूपों में हमारे सामने आता है। परिवर्तन कभी शीघ्र आता है तो कभी देरी से। इसलिए कठिनाइयों के कारण जीवन का अन्त करने का विकल्प कभी अपने मन में न लायें। कठिन समय को प्रार्थना व लक्ष्य  बदल सकता है। प्रार्थना व लक्ष्य के माध्यम को पकड़े रखो। हर समस्या का समाधान होता है। कुछ रोगों का इलाज दवा से होता है, कुछ को ओपरेशन की ज़रूरत होती है। ऐसा ही कठिनाईयों को ले कर भी होता है। अतः लक्ष्य व आत्म विश्वाश को कस कर पकड़े रखो। इसके लिए, प्रयत्न करना होगा। कुछ अच्छा पाने के लिए, प्रयत्न की सदैव आवश्यकता होती है, जबकि चिंता या निराशा में डूबने के लिए कोई प्रयत्न नहीं करना पड़ता। हमें चाहिए – समय, प्रयत्न तथा लक्ष्य की ओर ध्यान दे ।  हमारे पुरुषार्थ का फ़ल भी तत्काल तो नहीं प्राप्त होता, समय से ही होता है।  हमें वर्तमान में ही रहना चाहिए और इसे सुंदर बनाना चाहिए क्योंकि न तो भूतकाल एंव न ही भविष्यकाल पर हमारा नियंत्रण है |“अगर खुश रहना है एंव सफल होना है तो उस बारे में सोचना बंद कर दें जिस पर हमारा नियंत्रण न हो !  
उत्तम जैन (विद्रोही )